डेस्क : भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने और यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता साफ होने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम मिलने की प्रक्रिया कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वजह से संभव हो पाई है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस उपलब्धि को अपनी सरकार की सफलता के तौर पर पेश कर रहे हैं, लेकिन इसकी नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने रखी थी। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु सहयोग समझौता 8 अक्टूबर 2008 को कानून बना था और इसी समझौते के बाद भारत के लिए वैश्विक परमाणु सहयोग के रास्ते खुले।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने उस समय इस ऐतिहासिक समझौते का संसद और संसद के बाहर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसे फैसले लेती है जो देश के लिए बड़े बदलाव लाते हैं, जबकि भाजपा बाद में उन्हीं फैसलों को आगे बढ़ाती है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु समझौते को मिला नया आधार
दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को नागरिक परमाणु सहयोग समझौते के तहत प्रशासनिक व्यवस्था (Administrative Arrangement) को अंतिम रूप दिया है। इससे भारत को ऑस्ट्रेलिया से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता खुल गया है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा को लेकर आयोजित विशेष प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ष 2014 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौता हुआ था, लेकिन यूरेनियम आपूर्ति को लागू करने के लिए कुछ प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी थीं।
उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग और निगरानी से जुड़े कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी, जिसके कारण समझौते को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। पिछले दो वर्षों में हुई गहन बातचीत के बाद दोनों देशों ने इन मुद्दों का समाधान निकाल लिया है।
अब निजी कंपनियां करेंगी यूरेनियम आपूर्ति के लिए समझौते
विदेश सचिव ने बताया कि अब भारत और ऑस्ट्रेलिया की संबंधित कंपनियां यूरेनियम आपूर्ति को लेकर व्यावसायिक समझौते करेंगी। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में यूरेनियम व्यापार से जुड़ी निजी कंपनियां और भारत की संबंधित संस्थाएं आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगी।
भारत-ऑस्ट्रेलिया की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि प्रशासनिक व्यवस्था पर हस्ताक्षर से ऑस्ट्रेलिया से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम निर्यात का रास्ता खुलेगा। यह आपूर्ति पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा मानकों के तहत होगी।
PM मोदी ने बताया स्वच्छ ऊर्जा के लिए अहम कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ बातचीत के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हुआ यह समझौता भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजनाओं को मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
वहीं, कांग्रेस ने इस उपलब्धि का श्रेय यूपीए सरकार के समय हुए परमाणु समझौते को देते हुए केंद्र सरकार पर राजनीतिक श्रेय लेने का आरोप लगाया है।













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