डेस्क: पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार को एक नई रणनीतिक रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में दोनों पक्षों ने कहा कि किसी एक देश पर हमला “दोनों पर आक्रामक कार्रवाई” माना जाएगा।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब कुछ ही दिन पहले इज़राइल ने पड़ोसी कतर में हमास नेताओं को निशाना बनाकर हवाई हमला किया था, जिसने खाड़ी देशों में चिंता की लहर दौड़ा दी। इन देशों ने अब तक अपनी सुरक्षा के लिए मुख्य रूप से अमेरिका पर भरोसा किया है।
सऊदी प्रेस एजेंसी द्वारा जारी बयान के अनुसार, “यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के पहलुओं को विकसित करने और किसी भी आक्रामकता के खिलाफ संयुक्त प्रतिरोध को मज़बूत करने का उद्देश्य रखता है। समझौते में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।”
इस संधि पर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने हस्ताक्षर किए।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान और भारत ने मई में चार दिनों तक चले भीषण संघर्ष में एक-दूसरे पर मिसाइल, ड्रोन और तोपखाने से हमला किया था। इस झड़प में दोनों ओर 70 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 1999 के बाद यह दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच सबसे गंभीर संघर्ष माना गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल अप्रैल में सऊदी अरब का दौरा किया था, लेकिन भारत में पर्यटकों पर हुए घातक आतंकी हमले के बाद उन्हें अपनी यात्रा बीच में ही छोड़कर लौटना पड़ा। इस घटना ने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष को जन्म दिया था। माना जाता है कि इस संघर्ष को शांत करने में सऊदी अरब ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
सऊदी अरब लंबे समय से भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करता आ रहा है। भारत, जो दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, अपनी अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने के लिए पेट्रोलियम आयात पर अत्यधिक निर्भर है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, सऊदी अरब भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान के सऊदी अरब से दशकों पुराने गहरे संबंध हैं। अनुमान है कि करीब 25 लाख पाकिस्तानी नागरिक वर्तमान में सऊदी अरब में रहते और काम करते हैं। साथ ही, आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को सँभालने में भी सऊदी अरब हमेशा एक मज़बूत सहारा रहा है।













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