नई दिल्ली/पेरिस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस तकनीक का लोकतंत्रीकरण आवश्यक है, ताकि इसके लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकें। वह पेरिस में आयोजित 10वें VivaTech शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर वैश्विक तकनीकी कंपनियों और स्टार्टअप्स का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि सरकार नियमों को सरल बना रही है और व्यापार करने की प्रक्रिया को अधिक सुगम कर रही है। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों से भारत पवेलियन का दौरा करने और देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की ऊर्जा और नवाचार क्षमता को समझने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि भारत पवेलियन देश के उभरते तकनीकी क्षेत्र की शक्ति को दर्शाता है, जिसमें दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड रॉकेट इंजन, उन्नत जेनेटिक इंजीनियरिंग आधारित उपचार और एआई आधारित कैंसर पहचान जैसी तकनीकें शामिल हैं।
एआई के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लिए एआई का अर्थ समावेशी विकास है, जो समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ता है। उन्होंने अमूल द्वारा विकसित “सरलाबेन” नामक वॉयस-बेस्ड एआई सहायक का उदाहरण देते हुए कहा कि यह तकनीक डेयरी किसानों को पशुधन प्रबंधन, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों में सहायता प्रदान कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरने वाला पहला देश है। साथ ही उन्होंने डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए स्वामित्व योजना, पीएम गतिशक्ति और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी पहलों को उल्लेखनीय बताया।
उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बन चुका है और दुनिया के कुल रीयल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शंस का लगभग आधा हिस्सा यूपीआई के माध्यम से भारत में होता है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि यूपीआई की सुविधा अब फ्रांस में भी उपलब्ध है, जिससे लोग एफिल टॉवर और पेरिस एयरपोर्ट पर इसका उपयोग कर सकते हैं।
डिजिटल दस्तावेज़ीकरण के क्षेत्र में डिजिलॉकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह सेवा लगभग 70 करोड़ लोगों को बिना कागज़ी दस्तावेजों के प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध करा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने तकनीक के सहारे व्यापक परिवर्तन देखा है, जिसमें डिजिटल पहचान प्रणाली, भुगतान व्यवस्था, वित्तीय समावेशन, शिक्षा, टेलीमेडिसिन और कृषि जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस में शीर्ष कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात की और भारत में निवेश संभावनाओं पर चर्चा की। इसके अलावा उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया और कई वैश्विक नेताओं, जिनमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं, से बातचीत की।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह चर्चाएं शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, रेलवे, निर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रहीं।













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