मुंबई: महाराष्ट्र में राज्यसभा की एक सीट को लेकर विपक्षी दलों के बीच चले राजनीतिक मंथन के बाद आखिरकार वरिष्ठ नेता शरद पवार के नाम पर सहमति बन गई है। इसके साथ ही प्रियंका चतुर्वेदी का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया और उन्हें दूसरा मौका नहीं मिल सका।
जानकारी के अनुसार उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के भीतर प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा राज्यसभा भेजने की इच्छा थी। हालांकि राजनीतिक समीकरण और विपक्षी दलों के बीच सीट को लेकर बनी रणनीति के कारण अंततः शरद पवार के नाम पर सहमति बनानी पड़ी।
इस बीच पार्टी के अंदर मतभेद की चर्चाएं भी सामने आईं। बताया जा रहा है कि आदित्य ठाकरे प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से मौका देने के पक्ष में थे, जबकि वरिष्ठ नेता संजय राउत ने पहले ही शरद पवार को राज्यसभा भेजने का भरोसा दिया था। अंततः राजनीतिक परिस्थितियों के चलते पार्टी को उसी निर्णय पर सहमत होना पड़ा।
इन चर्चाओं के बीच संजय राउत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह फैसला पूरी तरह राजनीतिक गणित के आधार पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा राज्यसभा भेजने की इच्छा जरूर थी, लेकिन आवश्यक संख्या बल उपलब्ध नहीं था।
संजय राउत के अनुसार, यदि राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल होतीं और शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता मैदान में नहीं होते, तो निश्चित रूप से प्रियंका चतुर्वेदी के नाम पर विचार किया जाता। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर उन्हें एक और मौका देने की प्रबल इच्छा थी।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में इस बार राज्यसभा की सात सीटें खाली हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इनमें से छह सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट विपक्ष के खाते में जाने की संभावना है। इसी सीट को लेकर कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और उद्धव ठाकरे गुट के बीच चर्चा चल रही थी, जिसके बाद अंततः शरद पवार के नाम पर सहमति बनी।
उधर सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से रामदास आठवले और विनोद तावड़े को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। माना जा रहा है कि संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहने वाले विनोद तावड़े को अब राज्यसभा भेजकर उनके योगदान का सम्मान किया जा रहा है।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

