रायगड:जन-जन को पावन बनाने के लिए, जन-जन को आध्यात्मिकता से भावित बनाने के लिए गतिमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-66 से महाड़ को पावन बनाकर पुनः उसी राजमार्ग पर गति करते हुए बुधवार को माणगांव में पधारे तो माणगांववासी दूसरी बार अपने आराध्य के पदार्पण से अत्यंत आह्लादित नजर आ रहे थे। माणगांववासियों ने युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का भावभीना स्वागत किया। भव्य स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री माणगांव में स्थित श्री जैन संघ के श्री महावीर भवन में पधारे।
श्री महावीर भवन के सामने की ओर स्थित श्री अमृतभाई दोसी के भवन परिसर में आयोजित मंगल प्रवचन में उपस्थित जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि दसवेआलियं के एक श्लोक में अनुस्रोत और प्रतिस्रोत की बात बताई गई है। प्रवास के साथ-साथ आगे बढ़ना अनुस्रोत होता है और प्रवाह के विरुद्ध अथवा विपरित चलना प्रतिस्रोतगामिता होती है। अनुस्रोत जितना सरल होता है, प्रतिस्रोतगामिता कठिन होती है। इस संसार को देंखे तो भौतिकतावाद के साथ चलना अनुस्रोतगामिता हो जाती है और अध्यात्मवाद की दिशा में आगे बढ़ना प्रतिस्रोतगामिता होती है।
भौतिकतावाद में पदार्थों के प्रति आदमी का आकर्षण होता है। भोग चेतनाएं प्रबल होती हैं, इन्द्रिय विषयों के प्रति लगाव अनुस्रोत की बात होती है। भौतिकता के चीजों से मानव आकर्षित होता है। मनोज्ञ के प्रति राग और अमनोज्ञ के प्रति द्वेष की भावना भी होती है। इस संसार में कुछ पाने के लिए और जीवन को उन्नति की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिस्रोतगामी बनने का प्रयास होना चाहिए। जीवन में समता की साधना हो तो आदमी मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
जीवन में संयम रखने का प्रयास करना चाहिए। भोजन में, पदार्थों मंे और इन्द्रिय विषयों में आदमी को संयम रखने का प्रयास करना चाहिए। संयमित होने के साथ-साथ आदमी को स्वावलम्बी भी होने का प्रयास करना चाहिए। समता को धर्म कहा गया है। समता की भावना के विकास से सुख की प्राप्ति हो सकती है। इस प्रकार आदमी को प्रतिस्रोतगामी बनकर अध्यात्म की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्यश्री ने माणगांव में दूसरी बार पधारने के संदर्भ में कहा आज यहां हमारा पुनरागमन हो गया है। भगवान महावीर से जुड़े इस भवन में भगवान महावीर की वाणी का जितना सदुपयोग हो सके, करने का प्रयास हो।
आचार्यश्री के स्वागत में श्रीमती अस्मिता गांधी, श्री रमेश बम्ब, श्री अशोक बम्ब, श्री लादूलाल गांधी, श्रीमती सान्ध्या दलाल, श्रीमती रिनाजी व श्री बाबूलाल बाफना ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी और आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।













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