लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई कोचिंग सेंटरों में बेसमेंट में कक्षाएं संचालित होने, उचित वेंटिलेशन न होने और फायर सेफ्टी एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के अभाव को लेकर हादसों का खतरा बढ़ने की बात सामने आई है।
जांच और निरीक्षण में यह पाया गया है कि शहर के कई प्रमुख कोचिंग संस्थान भवन नियमों और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए संचालित हो रहे हैं। बेसमेंट में चल रही कक्षाओं में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में दम घुटने या आग फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।
इसके अलावा कई संस्थानों के पास फायर विभाग से आवश्यक एनओसी भी नहीं है। नियमों के अनुसार व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन निकास मार्ग और उचित वेंटिलेशन अनिवार्य हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत दिखाई देती है।
फायर विभाग के निरीक्षण में यह भी सामने आया है कि कई कोचिंग सेंटरों में एक ही प्रवेश और निकास मार्ग है, जिससे आग जैसी आपात स्थिति में निकासी बेहद कठिन हो सकती है। कुछ संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित इन कोचिंग संस्थानों में नियमों की अनदेखी छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। हाल ही में हुए अग्निकांडों के बाद भी कई संस्थानों में सुधार न होना प्रशासनिक लापरवाही को भी दर्शाता है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर कोचिंग संस्थानों की निगरानी, भवन मानकों के पालन और फायर सेफ्टी नियमों के सख्त क्रियान्वयन की आवश्यकता को उजागर किया है।













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