नई दिल्ली:लोकसभा चुनाव के बीच कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए अरविंद सिंह लवली ने दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर इस्तीफा देते हुए उन्होंने आम आदमी पार्टी से गठबंधन और कन्हैया कुमार और उदित राज का नाम लिए बगैर बाहरियों को टिकट देने का आरोप लगाया था। अब उनके इस पत्र पर उदित राज की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि किसी के आने जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होता। पार्टी बड़ी होती है व्यक्तित्व नहीं।
उन्होंने कहा, याद रखना मेरी बात, अब पार्टी खड़ी होगी। जो 15 साल विधायक और 20 साल मंत्री रहा। पार्टी संघर्ष कर रही थी लेकिन उन्होंने पार्टी को खड़ा करने के लिए क्या किया? सिर्फ गुटबाजी और फ्रेंचाइजी सिस्टम बना दिया है। बिचौलिए थे, वह काम नहीं करते हैं सिर्फ चेले पालते हैं। इस चेले सिस्टम की वजह से ही पार्टी से नए लोग नहीं जुड़ रहे। इससे पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया ने भी लवली के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनका इस्तीफा कांग्रेस हाईकमान ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। अरविन्दर सिंह लवली के इस्तीफे के बाद हमें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा कोई काम रुक जाएगा या हमारे उम्मीदवार हार जाएंगे। उन्होंने कहा, मैंने उन्हें कई जगहों पर रोका क्योंकि जिन लोगों को प्रमोट नहीं किया जाना चाहिए था, उन्हें प्रमोशन दिया जा रहा था। और इससे पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं पर प्रभाव पड़ा…”
दीपक बाबरिया पर भी लगाए थे आरोप
बता दें, लवली सिंह ने अपने इस्तीफे में दीपक बाबरिया पर भी कई आरोप लगाए थे। लवली ने कहा था कि वह अपने आप को लाचार महसूस कर रहे थे, क्योंकि दिल्ली इकाई के वरिष्ठ नेताओं द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए सभी फैसलों पर दीपक बाबरिया रोक लगा देते थे। इस बीच, बाबरिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के मुद्दे पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति (डीपीसीसी) के सभी नेताओं को विश्वास में लिया गया था और लवली को पार्टी समिति के समक्ष अपने विचार रखने चाहिए थे।
बाबरिया ने कहा कि यह ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ है कि लवली का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब देश में लोकसभा चुनाव हो रहा है, लेकिन इसका कांग्रेस के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बाबरिया ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने से पहले डीपीसीसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिया गया था। वह (लवली) सभी समितियों का हिस्सा थे। उन्हें उसी समय अपनी आपत्ति उठानी चाहिए थी। जो कोई भी किसी पार्टी या पद से खुद को दूर करता है, वह ऐसा करने का कारण ढूंढ़ लेता है।’’
उन्होंने लवली की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘पार्टी ने उन पर भरोसा दिखाया और इतना बड़ा पद दिया, लेकिन उन्होंने जो किया वह दुखद है। उनके इस्तीफे से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा और मुझे विश्वास है कि हम चुनाव में हम अपने हिस्से की दिल्ली की तीनों लोकसभा सीट जीतेंगे।’’













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