नई दिल्ली :ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना पाकिस्तान पर समुद्री मोर्चे से बड़े हमले के बेहद करीब पहुंच चुकी थी, लेकिन अंतिम क्षणों में इस कार्रवाई को रोक दिया गया। यह खुलासा नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने किया है।
एक अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि नौसेना पूरी तरह तैयार थी और समुद्र के रास्ते निर्णायक कार्रवाई शुरू होने ही वाली थी। उन्होंने संकेत दिया कि हालात इतने गंभीर हो चुके थे कि किसी भी क्षण सैन्य टकराव का विस्तार हो सकता था, लेकिन तभी पाकिस्तान की ओर से तनाव कम करने का अनुरोध सामने आया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी। इस हमले में कई लोगों की जान गई थी, जिसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की थी।
हालांकि उस समय सेना और वायुसेना की कार्रवाई पर अधिक ध्यान रहा, लेकिन अब सामने आया है कि नौसेना की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण थी। नौसेना ने अरब सागर में अपनी रणनीतिक तैनाती के जरिए पाकिस्तान पर जबरदस्त दबाव बनाया। युद्धपोत और समुद्री हमले की क्षमताएं पूरी तरह सक्रिय स्थिति में थीं, जिससे पाकिस्तान को बहु-आयामी युद्ध की आशंका का सामना करना पड़ रहा था।
तीनों सेनाओं—थल, वायु और नौसेना—के बीच बेहतर समन्वय ने भारत की सैन्य रणनीति को और प्रभावी बनाया। इसी संयुक्त दबाव के चलते पाकिस्तान को तनाव कम करने की पहल करनी पड़ी और अंततः दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति बनी।
नौसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जहां तकनीक, त्वरित निर्णय क्षमता और बहु-आयामी तैयारी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को भविष्य की रणनीति का अहम स्तंभ बताते हुए नौसेना की तैयारियों को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह खुलासा इस बात की झलक देता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्थिति कितनी संवेदनशील और विस्फोटक हो गई थी, जहां एक कदम और बढ़ता तो अरब सागर युद्ध का नया मोर्चा बन सकता था।













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