जयपुर : आचार्य श्री महाश्रमण जी के 53वें दीक्षा दिवस के पावन अवसर पर निर्माण नगर स्थित महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल परिसर के नवनिर्मित संबोधि सभागार में एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत वातावरण में संतवाणी का अमृत प्रवाहित हुआ।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ महाराज ने जीवन में समय-प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए समय का समुचित नियोजन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कार्य में सफलता और इच्छित परिणाम की प्राप्ति तभी संभव है, जब व्यक्ति समय के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करे। आगम सूत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस कार्य के लिए जो समय निर्धारित है, उसे उसी समय करना ही श्रेयस्कर होता है, अन्यथा पश्चाताप के अतिरिक्त कुछ प्राप्त नहीं होता।
मुनि श्री ने आचार्य श्री महाश्रमण जी को समय-प्रबंधन का प्रेरक पुरुष बताते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन अनुशासन और समयबद्धता का अनुपम उदाहरण है। उनके प्रत्येक कार्य में समय के प्रति सजगता और नियमितता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने दीक्षा के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दीक्षा वास्तव में एक नए जन्म और नए जीवन की शुरुआत है। यह सांसारिक बंधनों से मुक्ति और संयममय जीवन की ओर अग्रसर होने का पावन मार्ग है। उन्होंने कहा कि आचार्य महाश्रमण जी ने संयम ग्रहण करने के पश्चात निरंतर अप्रमत्त रहकर साधना का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। वे श्रमण परंपरा में ‘महाश्रमण’ के रूप में प्रतिष्ठित हैं और वर्तमान पंचम काल में एक उच्च कोटि के आत्मसाधक हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर एवं गुरु भक्ति गीतों के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर भाग लिया। बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने गुरु गुणानुवाद का रसास्वादन किया और आध्यात्मिक वातावरण में लीन रहे। अंत में मंगल पाठ एवं मंगल घोष के साथ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
यह आयोजन न केवल श्रद्धा और भक्ति का संगम बना, बल्कि समय-प्रबंधन, संयम और आध्यात्मिक साधना के प्रति जागरूकता का प्रेरणादायी संदेश भी दे गया।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
