नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुपरटेक रियलटर्स के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। NCLT की दो सदस्यीय दिल्ली पीठ ने 168.04 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने के मामले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की दिवाली याचिका को स्वीकार कर लिया। न्यायाधिकरण ने सुपरटेक की एक सहायक कंपनी सुपरटेक रियलटर्स के बोर्ड को निलंबित करते हुए अंजू अग्रवाल को अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) नियुक्त किया है। बता दें कि भुगतान में चूक को लेकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सुपरटेक रियलटर्स के बीच विवाद 2018 से चल रहा है। आखिरकार 2022 में बैंक ने एनसीएलटी के समक्ष एक याचिका दायर की गई।
आवेदक (बैंक) ने एनसीएलटी के समक्ष प्रस्तुत किया है कि नियमों और शर्तों के विपरीत, सुपरटेक रियलटर्स वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में विफल रहे। वहीं, कई अन्य उल्लंघनों के अलावा खातों को ठीक से बनाए रखने में चूक की। एनसीएलटी के आदेश में कहा गया है कि आईआरपी अन्य बातों के साथ-साथ संहिता, नियमों और विनियमों की धारा 15, 17, 18, 19, 20 और 21 के अनुसार अपने सभी कार्य करेगा। बता दें कि कंपनी अपने सुपरनोवा प्रोजेक्ट में आवासीय अपार्टमेंट, कार्यालय, खुदरा क्षेत्र और लक्जरी होटल विकसित कर रही है।
सुपरनोवा परियोजना में 4 टावर
सुपरटेक समूह की महत्वाकांक्षी सुपरनोवा परियोजना में कुल चार टावर हैं – नोवा ईस्ट, नोवा वेस्ट, एस्ट्रालिस और स्पाइरा है। इन गगनचुंबी इमारतों में 80 मंजिलें हैं और इन्हें 300 मीटर की ऊंचाई पर दिल्ली-एनसीआर की सबसे ऊंची इमारतें माना जाता है।
सुपरटेक भी कर रही सामना
सुपरटेक कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) का सामना कर रही है। सुपरटेक रियलटर्स नोएडा के सेक्टर-94 में 70,002 वर्ग मीटर भूमि पर 2,326.14 करोड़ रुपये की लागत से सुपरनोवा परियोजना विकसित कर रही है। हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने धनशोधन मामले में सुपरटेक के चेयरमैन आर.के. अरोड़ा को जमानत दे दी है।













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