डेस्क : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया है कि तलाक के बाद आपसी सहमति से तय की गई आर्थिक राशि महिला की संपत्ति मानी जाएगी और उसकी मृत्यु की स्थिति में उसका उत्तराधिकार कानून के अनुसार तय होगा।
मामला एक ऐसे दंपति से जुड़ा था, जिन्होंने आपसी सहमति से तलाक लिया था। समझौते के तहत पति को पत्नी को कुल 20 लाख रुपये देने थे। इसमें से 4 लाख रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया गया था, जबकि शेष 16 लाख रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से किया जाना था। इसी बीच महिला की मृत्यु हो गई।
इसके बाद यह सवाल उठा कि शेष राशि पर अधिकार किसका होगा—पूर्व पति का या महिला के परिवार का।
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि तलाक के बाद पति-पत्नी का वैवाहिक संबंध समाप्त हो जाता है। ऐसे में समझौते के तहत मिलने वाली राशि महिला की संपत्ति का हिस्सा मानी जाएगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि महिला की मृत्यु बिना वसीयत के होती है, तो उसकी संपत्ति का उत्तराधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अनुसार तय होगा।
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि तलाक के बाद पूर्व पति का कानूनी उत्तराधिकार समाप्त हो जाता है। इसी आधार पर कोर्ट ने महिला की मां को कानूनी उत्तराधिकारी मानते हुए शेष 16 लाख रुपये उसे देने का आदेश दिया।













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