वॉशिंगटन : वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति का सीधा असर अब अमेरिका के ईंधन बाजार पर दिखाई देने लगा है। हालात यह हैं कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 44.5 प्रतिशत तक की तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव काफी बढ़ गया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी से उछाल आया है, जिसका सबसे बड़ा असर अमेरिका और यूरोपीय देशों में देखा जा रहा है।
अमेरिका के कई राज्यों में पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। ट्रांसपोर्ट सेक्टर, लॉजिस्टिक्स कंपनियां और आम उपभोक्ता इस बढ़ोतरी से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ रही है, जिसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
सरकारी और आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में यह बढ़ोतरी अस्थायी नहीं मानी जा रही है, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन अभी भी बना हुआ है। वहीं, तेल उत्पादक देशों की नीतियां और उत्पादन स्तर भी कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
अमेरिकी ऊर्जा विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और रणनीतिक भंडार (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व) के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है ताकि घरेलू बाजार में स्थिरता लाई जा सके।













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