डेस्क : भारत की अर्थव्यवस्था तीसरी तिमाही में भी मजबूती के संकेत दे रही है। विशेषज्ञों और बैंकिंग रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर २०२५ की अवधि में भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि लगभग आठ दशमलव तीन प्रतिशत रहने की संभावना है। यह पिछले साल इसी तिमाही के छह दशमलव चार प्रतिशत से कहीं अधिक है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में ठोस सुधार का संकेत मिलता है।
वृद्धि के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, आंतरिक मांग में तेजी, जीएसटी दरों में कटौती और विनिर्माण तथा कृषि क्षेत्र में सुधार प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से यह वृद्धि संभव हुई है। साथ ही, सकल मूल्य वर्धन भी लगभग आठ प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आधार वर्ष में बदलाव और पूर्णवार्षिक अनुमान
सरकार ने जीडीपी के बेस वर्ष को दो हजार ग्यारह-बारह से बदलकर दो हजार बाईस-तेइस कर दिया है, जिससे आंकड़ों की तुलना अधिक सटीक होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस आधार पर पूरे वित्त वर्ष २०२५-२६ की जीडीपी वृद्धि लगभग सात दशमलव छह प्रतिशत रहने की संभावना है।
भारत और जापान
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नई आधार श्रृंखला के आंकड़े यह संकेत दे सकते हैं कि भारत कब जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। वर्तमान में जापान की अर्थव्यवस्था लगभग चार दशमलव चार ट्रिलियन डॉलर की है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार जारी है और घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। आधार वर्ष परिवर्तन और निवेश में सुधार तिमाही के आंकड़ों को और अधिक सकारात्मक बनाते हैं।
निष्कर्ष:
भारत की अर्थव्यवस्था तीसरी तिमाही में मजबूत वृद्धि के संकेत दे रही है, जो वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और आधार प्रभाव के बावजूद आर्थिक मजबूती का परिचायक है।













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