नई दिल्ली: अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर जारी तनाव और डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार रुपये की स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल रुपया ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं।
वित्त मंत्री ने हाल ही में लागू किए गए जीएसटी सुधारों को “लोगों के लिए सुधार” बताते हुए कहा कि दरों में कमी का सबसे अधिक लाभ गरीब से गरीब परिवार तक पहुंचेगा। सीतारमण ने बताया कि कर दरों में कटौती से मासिक घरेलू खर्च—जैसे राशन और दवाइयों के बिल—कम होंगे, वहीं नई गाड़ियाँ, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसी वस्तुओं की खपत भी बढ़ेगी। इससे निजी उपभोग में वृद्धि होगी और आर्थिक वृद्धि का एक सकारात्मक चक्र शुरू होगा।
उन्होंने कहा कि 395 वस्तुओं की कीमतें कम होने वाली हैं और इसके लिए सरकार ने उद्योगों से बातचीत की है। कई कंपनियों ने पहले ही दाम घटाने की घोषणा कर दी है। “22 सितंबर से हमारा पूरा ध्यान इसी पर होगा कि लोगों को कर कटौती का लाभ मिले,” वित्त मंत्री ने कहा।
राजकोषीय घाटे पर संभावित असर के सवाल पर सीतारमण ने भरोसा जताया कि खपत बढ़ने से राजस्व में वृद्धि होगी और सरकार इस साल ही 48,000 करोड़ रुपये के अनुमानित बोझ की भरपाई कर लेगी। उन्होंने कहा, “राजकोषीय प्रबंधन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। मैं अपने आंकड़ों पर कायम हूं।”
विपक्ष द्वारा जीएसटी सुधारों की आलोचना को उन्होंने ‘गलत जानकारी’ पर आधारित बताया और कहा कि जीएसटी की चार दरें तय करने का निर्णय केवल भाजपा का नहीं था, बल्कि कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्री भी उसमें शामिल थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश को बेहतर विपक्ष और सक्षम नेताओं की जरूरत है।
वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में भी सुधारों का सिलसिला जारी रहेगा। “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड काल में भी संरचनात्मक सुधार किए। सुधार उनकी प्राथमिकता है और यही जारी रहेगा,” उन्होंने कहा।
सीतारमण ने यह भी बताया कि जीएसटी दर कटौती का फायदा मध्यमवर्गीय परिवारों को मासिक स्तर पर कितनी बचत दिला पाएगा, इसका आकलन दो-तीन महीने बाद ही संभव होगा। उन्होंने माना कि शुरुआत में उपभोग में उछाल आएगा, लेकिन यह कब तक टिकेगा, यह देखने की बात होगी।
इस बीच, रुपये की गिरावट पर उन्होंने कहा कि यह केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई देशों की मुद्राएँ डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं। वहीं, चीन के साथ व्यापार वार्ताओं को आगे बढ़ाने और अमेरिकी शुल्कों से प्रभावित निर्यातकों के लिए राहत पैकेज तैयार करने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हालिया सकारात्मक संवाद पर वित्त मंत्री ने कहा कि भारत केवल उम्मीद कर सकता है कि शुल्क विवाद सुलझे और द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हों।













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