हिंदू धर्म में पितृ पक्ष काफी महत्वपूर्ण माने गए हैं। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं। पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने से पितरों की आत्मा को शांति व मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्र मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से होती है और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक रहते हैं। आइए जानते हैं पितृ पक्ष आरंभ डेट, महत्व, विधि और सामग्री की पूरी लिस्ट-
त पृक्ष 2024 श्राद्ध तिथियां-
पूर्णिमा का श्राद्ध – 17 सितंबर 2024 (मंगलवार)
प्रतिपदा का श्राद्ध – 18 सितंबर 2024 (बुधवार)
द्वितीया का श्राद्ध – 19 सितंबर 2024 (गुरुवार)
तृतीया का श्राद्ध – 20 सितंबर 2024 (शुक्रवार)
चतुर्थी का श्राद्ध – 21 सितंबर 2024 (शनिवार)
महा भरणी – 21 सितंबर 2024 (शनिवार)
पंचमी का श्राद्ध – 22 सितंबर 2024 (रविवार)
षष्ठी का श्राद्ध – 23 सितंबर 2024 (सोमवार)
सप्तमी का श्राद्ध – 23 सितंबर 2024 (सोमवार)
अष्टमी का श्राद्ध – 24 सितंबर 2024 (मंगलवार)
नवमी का श्राद्ध – 25 सितंबर 2024 (बुधवार)
दशमी का श्राद्ध – 26 सितंबर 2024 (गुरुवार)
एकादशी का श्राद्ध – 27 सितंबर 2024 (शुक्रवार)
द्वादशी का श्राद्ध – 29 सितंबर 2024 (रविवार)
मघा श्राद्ध – 29 सितंबर 2024 (रविवार)
त्रयोदशी का श्राद्ध – 30 सितंबर 2024 (सोमवार)
चतुर्दशी का श्राद्ध – 1 अक्टूबर 2024 (मंगलवार)
सर्वपितृ अमावस्या – 2 अक्टूबर 2024 (बुधवार)
पितृ पक्ष का महत्व-
पितृ पक्ष में पितर संबंधित कार्य करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है। पितरों के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि व संपन्नता आती है। पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान मृत्यु लोक से पूर्वज धरती लोक पर आते हैं। ऐसे में उनका तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।













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