नई दिल्ली:वायनाड में हाल ही में हुआ भूस्खलन एक दिल दहला देने वाली घटना है। इस भूस्खलन ने एक विशाल क्षेत्र को नष्ट कर दिया। इस भूस्खलन से 86,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल को प्रभावित किया जो 13 अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैदानों के बराबर है। इसरो ने इस घटना की सैटेलाइट इमेज जारी की है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कितने बड़े पहाड़ गिरे हैं और चार पहाड़ी गांव – चुरलमाला, मुंडक्कई, अट्टमाला और नुलपुझा – पूरी तरह से तबाह हो गए हैं।
31 जुलाई को इसरो के RISAT-2B उपग्रह ने भूस्खलन की छवि का विश्लेषण किया, जिसमें दिखाई दे रहा कि है कि ढहने के साथ-साथ कीचड़, बड़े पत्थर और पेड़ पहाड़ की ढलानों से नीचे गिर रहे थे। भूस्खलन की गति इतनी तेज थी कि यह आठ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद चलियार नदी की एक सहायक नदी में जा गिरा। इस तबाही ने गांवों को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया और साथ ही, बड़ी मात्रा में मिट्टी भी भरभरा कर नीचे आ गिरी है।
भूस्खलन समुद्र तल से 1500 मीटर की ऊंचाई पर हुआ था। जैसे-जैसे भूस्खलन बस्ती क्षेत्र की ओर बढ़ा, इसकी धाराए तेज होती गईं। वहीं स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, 48 घंटे में 570 मिमी बारिश हो चुकी है, जिससे नुकसान और जनहानि बढ़ी है। इस घटना के कारण 177 लोगों की मौत हो गई और 170 लोग अभी भी लापता हैं। यह आपदा वायनाड के लोगों के लिए एक बड़ा संकट बन गई है, और इसके असर को कम करने के लिए राहत और पुनर्वास कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।













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