डेस्क : डेनमार्क की प्रमुख बीयर निर्माता कंपनी कार्ल्सबर्ग ए/एस अपनी भारतीय इकाई कार्ल्सबर्ग इंडिया के संभावित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी इस महीने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल कर सकती है और इस आईपीओ के जरिए लगभग 700 मिलियन डॉलर (करीब 6,600 से 6,650 करोड़ रुपये) जुटाए जाने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार यह प्रस्तावित आईपीओ मुख्य रूप से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) आधारित होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक यानी मूल कंपनी कार्ल्सबर्ग ए/एस अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। इसका अर्थ है कि इस प्रक्रिया से जुटाई गई राशि सीधे कंपनी की भारतीय इकाई में नहीं बल्कि पेरेंट कंपनी को जाएगी।
इस प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम के लिए कार्ल्सबर्ग ने पहले ही प्रमुख निवेश बैंकों को नियुक्त किया है। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेपी मॉर्गन और सिटीग्रुप जैसी वैश्विक वित्तीय संस्थाएं शामिल हैं।
कार्ल्सबर्ग इंडिया देश की दूसरी सबसे बड़ी बीयर निर्माता कंपनी मानी जाती है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत है। कंपनी वर्ष 2007 से भारत में सक्रिय है और देशभर में इसके 14 ब्रुअरी यूनिट्स संचालित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार और प्रीमियम पेय पदार्थों की बढ़ती मांग वैश्विक कंपनियों को भारतीय शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए आकर्षित कर रही है। इससे पहले भी कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय बाजार में सूचीबद्ध होने या उसके लिए तैयारी करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं।
हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक आईपीओ को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। इसके आकार, समय और संरचना को लेकर अंतिम निर्णय बाजार परिस्थितियों और आंतरिक रणनीति पर निर्भर करेगा।
यदि यह आईपीओ सफलतापूर्वक लॉन्च होता है, तो यह 2026 के सबसे बड़े विदेशी निवेश प्रस्तावों में से एक माना जाएगा।













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