नई दिल्ली:शराब और मोहल्ला क्लीनिक के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने दिल्ली परिवहन निगम (DTC) पर भी सीएजी की रिपोर्ट विधानसभा में पेश कर दी है। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली विधान सभा में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के कामकाज पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की लंबित रिपोर्ट पेश की।
सीएजी की रिपोर्ट में डीटीसी में कई खामियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 से 2023 के बीच बसों की संख्या कम हो गई तो किसी भी रूट पर मुनाफा तो दूर संचालन खर्च भी नहीं निकल पाया।
कम हो गईं बसें
सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 8 साल के दौरान डीटीसी की करीब 400 बसें कम हो गईं। 2015-16 में डीटीसी के पास 4344 बसें थीं, जो 2022-23 में 3937 रह गईं। निगम 2021-22 और 2022-23 के दौरान केवल 300 इलेक्ट्रिक बसें खरीद पाया जबकि फंड मौजूद था।
ओवरएज बसों की संख्या में बड़ा इजाफा
सीएजी ने पाया कि 2015-22 के दौरान ओवरएज बसों की संख्या 0.13 फीसदी (5 बसों) से बढ़कर 17.44 फीसदी (656 बसें) जोकि 31 मार्च 2023 तक 44.96 पर्सेंट (1770) हो गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि नई बसों की खरीद के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए गए तो यह आंकड़ा और बढ़ेगा।
14 हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा
सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि डीटीसी किसी भी रूट पर संचालन खर्च नहीं निकाल पा रहा है। 2015 से 2022 के बीच डीटीसी को 14198.86 करोड़ रुपए का संचालन घाटा हुआ।













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