भारत के लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है मतदाता सूची, जिसे चुनाव आयोग नियमित रूप से अपडेट करता रहता है। किसी मतदाता के निधन या क्षेत्र परिवर्तन पर नाम हटाना, नए मतदाताओं के नाम जोड़ना—यह सब प्रक्रिया चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करती है। हर चुनाव से पहले चुनाव आयोग ‘सालाना विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (Special Summary Revision) करता है, जिसमें सूची में पहले से शामिल मतदाताओं को अतिरिक्त कागजात नहीं देने पड़ते।
लेकिन इस बार बिहार में एक अनोखी प्रक्रिया का फैसला लिया गया है — ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision), जो पिछले 22 वर्षों में पहली बार हो रहा है। पिछली बार यह 2003 में हुआ था।
विशेष गहन पुनरीक्षण क्यों?
बिहार में अब तक 7.89 करोड़ मतदाता सूचीबद्ध हैं, जिनमें से 4.96 करोड़ वे हैं जिनका नाम 2003 की सूची में दर्ज था। इन मतदाताओं को केवल गणना फॉर्म भरना होगा, बिना किसी प्रमाण पत्र के। जबकि बाकी 2.93 करोड़ मतदाताओं को जो 2003 के बाद जुड़े हैं या जो अब 18 वर्ष के हुए हैं, उन्हें जन्म और निवास से संबंधित 11 में से किसी एक दस्तावेज के साथ फॉर्म जमा करना अनिवार्य होगा।
मुख्य प्रक्रिया: गणना प्रपत्र (Enumeration Form)
मतदाता सूची के अद्यतन के लिए सबसे अहम है ‘गणना प्रपत्र’ या फॉर्म। यह फॉर्म बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) आपके घर स्वयं लेकर आएंगे, या मतदाता स्वयं चुनाव आयोग की वेबसाइट (https://voters.eci.gov.in/) और ECINet ऐप से डाउनलोड कर सकते हैं।
- फॉर्म दो कॉपी में दिया जाएगा: एक को भरकर वापस देना होगा और दूसरी अपने पास रखना होगा।
- फॉर्म में जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, पिता/माता/पति/पत्नी के नाम और अगर उपलब्ध हो तो उनकी मतदाता फोटो पहचान पत्र संख्या (EPIC) भरनी होती है।
- साथ में पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो देना जरूरी है।
दस्तावेजों की सूची
जो लोग 2003 के बाद जुड़े हैं या नए मतदाता हैं, उन्हें फॉर्म के साथ ये दस्तावेज देने होंगे, जिनमें से कोई एक मान्य होगा:
- केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम द्वारा जारी पहचान पत्र
- 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई पहचान पत्र या पेंशन आदेश
- जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र (मैट्रिक या उससे ऊपर)
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- वन अधिकार प्रमाण पत्र
- जाति प्रमाण पत्र (ओबीसी, एससी, एसटी)
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)
- पारिवारिक रजिस्टर
- जमीन या आवास का आवंटन पत्र
आम सवाल और उनके जवाब
क्या फॉर्म भरना जरूरी है?
हां, 24 जून 2025 तक सूची में नाम दर्ज मतदाताओं को फॉर्म भरना अनिवार्य है। नहीं तो 1 अगस्त को जारी होने वाली मसौदा सूची में नाम शामिल नहीं होगा।
बीएलओ फॉर्म लेने नहीं आ रहा?
बीएलओ को कम से कम तीन बार फॉर्म लेने आना होगा। यदि नहीं आते, तो मतदाता आयोग की वेबसाइट या ECINet ऐप से अधिकारियों के नंबर लेकर शिकायत कर सकता है।
क्या आधार कार्ड या पैन कार्ड दस्तावेज के तौर पर स्वीकार होंगे?
नहीं, आयोग ने इन्हें मान्यता नहीं दी है। केवल ऊपर बताई गई 11 दस्तावेजों में से कोई एक ही मान्य होगा।
बिहार के बाहर रहने वाले मतदाता क्या करें?
वे चुनाव आयोग की वेबसाइट या ऐप से फॉर्म डाउनलोड कर ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। बाद में बीएलओ सत्यापन के लिए उनके घर आएंगे।
निष्कर्ष
विशेष गहन पुनरीक्षण एक व्यापक और कड़ा कदम है, जो बिहार की मतदाता सूची को और अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और अपडेटेड बनाएगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि चुनाव में केवल योग्य और सक्रिय मतदाता ही शामिल हों।
लोकतंत्र की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सभी मतदाता जागरूक हों और समय पर अपना गणना फॉर्म भरकर जमा करें, ताकि उनका वोट सुरक्षित और मान्य रहे।













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