डेस्क:फ्रांस की संसद ने सोमवार को प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरो की सरकार को महज़ नौ महीने बाद ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गहरे राजनीतिक संकट में डाल दिया है, जिन्हें अब नया प्रधानमंत्री चुनना होगा।
बायरो ने संसद में विश्वास मत पेश कर सबको चौंका दिया। उनका प्रस्तावित कठोर मितव्ययिता बजट लगभग 44 अरब यूरो (52 अरब डॉलर) की बचत के जरिए देश के बढ़ते कर्ज़ को नियंत्रित करने की योजना पर आधारित था। मगर वोटिंग में सरकार को करारी हार मिली—364 सांसदों ने सरकार पर अविश्वास जताया जबकि केवल 194 ने समर्थन दिया।
आधुनिक फ्रांस के इतिहास में बायरो पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन गए हैं जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव से नहीं बल्कि उनके अपने विश्वास मत से सत्ता गंवानी पड़ी। मंगलवार सुबह वे राष्ट्रपति को अपना इस्तीफ़ा सौंप देंगे।
बायरो राष्ट्रपति मैक्रों के तहत छठे प्रधानमंत्री थे, लेकिन 2022 से अब तक पाँचवें। उनका जाना उस समय हुआ है जब मैक्रों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूक्रेन युद्ध के कूटनीतिक समाधान की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
बायरो ने संसद को संबोधित करते हुए कहा—“सबसे बड़ा ख़तरा यह था कि हम कुछ न करें और हालात जस के तस बने रहें। कर्ज़ का यह बोझ फ्रांस के लिए जीवन-घातक है।”
मैक्रों पर दबाव
अब राष्ट्रपति मैक्रों के सामने कठिन विकल्प है—या तो सातवें प्रधानमंत्री की नियुक्ति कर किसी तरह समझौता ढूँढें, या फिर समय से पहले आम चुनाव का जोखिम उठाएँ। लेकिन चुनाव से उनके दल की स्थिति सुधरेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
सोशलिस्ट पार्टी ने नई सरकार चलाने की पेशकश की है, लेकिन उसके टिके रहने पर संदेह है। उधर, न्याय मंत्री जेराल्ड डारमैनिन जैसे दाएँ पंथ के नेता मैक्रों के भरोसेमंद हैं, मगर वामपंथी उन्हें नकार सकते हैं।
एक सर्वेक्षण (Odoxa-Backbone/Le Figaro) के मुताबिक 64% फ़्रांसीसी चाहते हैं कि मैक्रों प्रधानमंत्री नियुक्त करने की बजाय खुद इस्तीफ़ा दें। वहीं, Ifop/Ouest-France के एक अन्य सर्वेक्षण में 77% लोगों ने मैक्रों के कामकाज को नकारात्मक बताया—यह उनका अब तक का सबसे खराब रेटिंग है।
ले पेन की उम्मीदें
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सामाजिक तनाव भी बढ़ रहा है। वामपंथी समूह ब्लॉक एवरीथिंग ने बुधवार को प्रदर्शन का आह्वान किया है, जबकि मज़दूर यूनियनों ने 18 सितंबर को हड़ताल की चेतावनी दी है।
2027 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी तस्वीर धुंधली है। विश्लेषकों का अनुमान है कि इस बार अतिदक्षिणपंथ (Far Right) के जीतने की संभावना सबसे प्रबल होगी।
हालाँकि, नेशनल रैली (RN) की नेता मरीन ले पेन को मार्च में यूरोपीय संसद से जुड़े फर्जी नौकरियों के घोटाले में दोषी करार दिया गया था। उन्हें चार साल की सज़ा (दो साल निलंबित), 100,000 यूरो का जुर्माना और पाँच साल तक चुनाव लड़ने पर रोक की सज़ा सुनाई गई।
लेकिन पेरिस की एक अदालत ने सोमवार को घोषणा की कि उनका अपील-शुनवाई जनवरी–फरवरी 2026 के बीच होगी—जिससे 2027 चुनाव से पहले उनकी उम्मीदें फिर से जीवित हो सकती हैं।
ले पेन ने संसद में मैक्रों पर दबाव डालते हुए कहा—“तुरंत मध्यावधि चुनाव कराना कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। बायरो की सरकार तो एक भूतिया सरकार थी।”













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