नई दिल्ली : देश में महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। जून 2026 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह पिछले 17 महीनों में पहली बार है जब खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर चली गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी रही। रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली कई जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं पर इसका असर देखने को मिला है।
इससे पहले मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 प्रतिशत दर्ज की गई थी। जून में इसमें बढ़ोतरी के साथ ही महंगाई एक बार फिर केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बन गई है। RBI अपनी मौद्रिक नीति में महंगाई नियंत्रण को सबसे अहम प्राथमिकताओं में रखता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महंगाई में बढ़ोतरी का असर आने वाले समय में ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों पर पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक अब महंगाई के रुख पर करीबी नजर रखेगा और जरूरत के अनुसार नीतिगत कदम उठा सकता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मानसून से जुड़ी स्थिति का असर आने वाले महीनों में महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि, आपूर्ति व्यवस्था बेहतर होने और उत्पादन में सुधार से भविष्य में राहत की उम्मीद भी जताई जा रही है।
महंगाई दर में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है, क्योंकि खाद्य सामग्री और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों में बदलाव उपभोक्ताओं को सीधे प्रभावित करता है।













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