डेस्क:मिस्र के शर्म अल-शेख में गाजा शांति सम्मेलन हो रहा है। इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह कर रहे हैं। विदेश राज्य मंत्री के शामिल होने पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा है कि क्या यह भारत की रणनीतिक दूरी दर्शाता है या फिर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मौका गंवा दिया है
दरअसल, इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में विश्व के प्रमुख नेता शामिल हो रहे हैं, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ता अल-सिसी, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस तथा ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, तुर्की, कतर और जॉर्डन जैसे देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य गाजा में युद्धविराम की रूपरेखा तैयार करना, मानवीय सहायता का समन्वय स्थापित करना तथा पुनर्निर्माण के लिए एक रोडमैप पर वैश्विक सहमति बनाना है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब दर्जनों देशों ने अपने राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री स्तर के प्रतिनिधियों को भेजा है, तब भारत का इतना निम्न स्तर का प्रतिनिधित्व हमारी आवाज को कमजोर कर सकता है और हमारी पहुंच को सीमित कर सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी विशेष व्यक्ति की क्षमता पर सवाल नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत संदेश भेजने का मुद्दा है। इतने सारे राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में भारत का निचला स्तर का प्रतिनिधित्व हमारी प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकता है। पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने इस फैसले पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह कदम रणनीतिक अलगाव जैसा प्रतीत होता है। उनके अनुसार, इस तरह की सीमित उपस्थिति से भारत को पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी राय प्रभावी रूप से रखने का मौका कम हो जाता है।













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