डेस्क: 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव (स्टैंडऑफ) के दौरान जिस एयरबेस से सैनिकों की तैनाती, खुफिया जानकारी संग्रह और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया गया था, अब वही बेस एक नई क्षमता हासिल कर चुका है। यहां अब सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे भारी ट्रांसपोर्ट विमानों का संचालन संभव होगा।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस अपग्रेड के बाद एलएसी (LAC) के पास तैनात सैनिकों और उपकरणों की आपूर्ति की गति लगभग दोगुनी हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम चीन की तरफ तेजी से बढ़ रही सीमा अवसंरचना के जवाब में भारत की हवाई शक्ति को और मजबूत करेगा।
साथ ही, इस बेस की नई क्षमताएं पाकिस्तान की उत्तरी सीमाओं पर निगरानी रखने में भी रणनीतिक रूप से अहम भूमिका निभाएंगी। कुल मिलाकर, यह विकास भारतीय वायुसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और सामरिक पहुंच दोनों को एक नए स्तर पर ले जाता है।













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