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Home राजनीतिक

ठाकरे ब्रदर्स आए साथ, पवार परिवार का भी मिलन; महाराष्ट्र में बदलेगा पावर गेम?

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
January 7, 2026
in राजनीतिक
Reading Time: 1 min read
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महाराष्ट्र

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में साल 2026 की शुरुआत एक बड़े चुनावी दंगल के साथ होने जा रही है। राज्य के 29 नगर निकायों के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है। कानूनी लड़ाई और लंबी देरी के बाद हो रहे ये चुनाव न केवल स्थानीय सत्ता का भविष्य तय करेंगे, बल्कि राज्य के बड़े सियासी गठबंधनों महायुति और महाविकास अघाड़ी (MVA) की मजबूती की भी अग्निपरीक्षा लेंगे।

इस चुनाव की सबसे बड़ी सुर्खी रिश्तों का दोबारा जुड़ना है। पिछले दो दशकों से अलग राह पर चलने वाले ठाकरे ब्रदर्स (उद्धव और राज ठाकरे) अब एक साथ आ गए हैं। ‘मराठी अस्मिता’ के मुद्दे पर शिवसेना (UBT) और मनसे (MNS) ने गठबंधन किया है। राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन मराठी मानुस के हक की लड़ाई के लिए है।

वहीं दूसरी ओर, पवार परिवार में भी सुलह की सुगहाट दिख रही है। अजीत पवार ने घोषणा की है कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनावों के लिए उनका गुट और शरद पवार का गुट (NCP-SP) मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अजीत पवार ने इसे ‘परिवार का मिलन’ बताया है, हालांकि यह तालमेल फिलहाल केवल इन दो शहरों तक ही सीमित है।

क्या दांव पर लगा है?

इन चुनावों का महत्व सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारी-भरकम बजट और संसाधनों की भी लड़ाई है। अकेले मुंबई महानगरपालिका (BMC) का बजट 74,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो देश के कई राज्यों और दुनिया के कई छोटे देशों की जीडीपी से भी बड़ा है। मुंबई, पुणे और नासिक जैसे शहर भले ही क्षेत्रफल में छोटे हों, लेकिन महाराष्ट्र की तिजोरी यहीं से भरती है। यही कारण है कि हर पार्टी इन निगमों पर कब्जा करना चाहती है।

बिखर गया महाविकास अघाड़ी?

नगर निकाय चुनाव की इस दौड़ में विपक्षी गठबंधन ‘MVA’ बिखरता नजर आ रहा है। कांग्रेस की ‘एकला चलो’ की नीति अपनाई गई। राज ठाकरे की उत्तर भारतीय विरोधी छवि के कारण कांग्रेस ने उनके साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि, कांग्रेस ने प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ कुछ सीटों पर समझौता किया है। 2024 के विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई जैसा है। उसका सीधा मुकाबला बीजेपी से है, जो फिलहाल काफी मजबूत स्थिति में दिख रही है।

महायुति में ‘फ्रेंडली फाइट’

सत्ताधारी गठबंधन ‘महायुति’ में भी सब कुछ सामान्य नहीं है। बीजेपी 137 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। लेकिन गठबंधन की तीसरी साथी अजीत पवार की एनसीपी करीब 100 सीटों पर अपने ही सहयोगियों (बीजेपी और शिंदे सेना) के खिलाफ उम्मीदवार उतार रही है।

पुराने नतीजों पर एक नजर

पिछली बार (2017-18) इन नगर निकायों में बीजेपी और अविभाजित शिवसेना का बोलबाला था। बीजेपी ने पुणे, नागपुर और नाशिक सहित 13 निगमों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि ठाणे शिवसेना का गढ़ बना रहा। मुंबई में दोनों ने मिलकर शासन किया था।

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