डेस्क : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई के असर से राहत देने वाला महंगाई भत्ता (DA) 7वें वेतन आयोग के कार्यकाल में अब तक की सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ा है। यह रुझान 5वें और 6वें वेतन आयोग के दौर से बिल्कुल अलग माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि DA की यह सुस्त बढ़ोतरी भविष्य में 8वें वेतन आयोग के तहत होने वाली सैलरी बढ़ोतरी को अपेक्षाकृत ज्यादा प्रभावी बना सकती है। गौरतलब है कि नया वेतन आयोग लागू होते ही कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाला DA और DR आमतौर पर शून्य (0%) पर रीसेट कर दिया जाता है।
पुराने वेतन आयोगों का पैटर्न
पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो 6वें वेतन आयोग (2006–2016) के दौरान महंगाई भत्ता बढ़कर बेसिक सैलरी के करीब 125 प्रतिशत तक पहुंच गया था। वहीं, 5वें वेतन आयोग (1996–2006) में DA लगभग 74 प्रतिशत के स्तर तक गया था। इसके उलट, 7वें वेतन आयोग के तहत फिलहाल DA 58 प्रतिशत पर है और मार्च में होने वाली अगली समीक्षा के बाद इसके करीब 60 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। नियम के मुताबिक DA में साल में दो बार—मार्च और अक्टूबर—संशोधन होता है, जिन्हें क्रमशः जनवरी और जुलाई से लागू माना जाता है।
8वें वेतन आयोग से पहले की तस्वीर
सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें वेतन आयोग का गठन किया था और इसे अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में उम्मीद है कि आयोग की रिपोर्ट मिड-2027 से पहले सामने नहीं आएगी। इस अवधि में DA में कम से कम तीन बार और बढ़ोतरी हो सकती है—मार्च 2026, अक्टूबर 2026 और मार्च 2027 में। यदि हर बार औसतन 2 से 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो 8वें वेतन आयोग के लागू होने से पहले DA करीब 70 प्रतिशत के आसपास पहुंच सकता है।
धीमी बढ़ोतरी की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक 7वें वेतन आयोग के दौरान DA की रफ्तार धीमी रहने की एक अहम वजह कोविड-19 महामारी का दौर भी रहा, जब 18 महीनों तक DA और DR की बढ़ोतरी पर रोक लगा दी गई थी। इसका मकसद सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव को सीमित रखना था। इसी कारण मौजूदा वेतन आयोग के तहत DA का कुल स्तर पिछले आयोगों की तुलना में कम नजर आ रहा है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
