नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन और प्रशासन में निर्णायक नेतृत्व को अपनी कार्यशैली का प्रमुख आधार बताते हुए अधिकारियों को हमेशा निडर होकर निर्णय लेने और परिणाम देने का संदेश दिया है। केंद्र में मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनके शासन मॉडल और प्रशासनिक दृष्टिकोण को लेकर नई चर्चा शुरू हुई है।
प्रधानमंत्री के साथ कार्य कर चुके कई वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2014 में सत्ता संभालने के बाद मोदी ने नौकरशाही को स्पष्ट संदेश दिया था कि केवल समस्याओं की पहचान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके समाधान और परिणाम भी सुनिश्चित होने चाहिए। प्रशासनिक तंत्र को उन्होंने जोखिम से बचने वाली मानसिकता के बजाय उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, मोदी की प्राथमिकता योजनाओं की आधारशिला रखने से अधिक उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और पूर्णता पर रही है। यही दृष्टिकोण पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार के गवर्नेंस मॉडल की पहचान बना।
मोदी सरकार के समर्थकों का कहना है कि बीते वर्षों में कई बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए, जिनमें जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए का निरसन, तीन तलाक पर प्रतिबंध, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, आयुष्मान भारत योजना, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा गरीबों के लिए मुफ्त राशन जैसी पहलें प्रमुख हैं।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर कहा कि उनकी सरकार ने जनकल्याण, विकास और सुशासन को केंद्र में रखकर काम किया है तथा विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प जारी रहेगा।
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और राजनीतिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज की। लगातार 4,399 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहकर उन्होंने स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड स्थापित किया।













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