डेस्क : रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद अब भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की तैयारी तेज़ हो गई है। भारत फ्रांस के साथ 100 से अधिक राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के एक बड़े प्रस्ताव पर बातचीत शुरू करने जा रहा है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत को सीमा पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से जुड़े सुरक्षा समीकरणों को लेकर बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
राफेल डील पर निर्णायक बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के फरवरी के तीसरे सप्ताह में संभावित भारत दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर चर्चा कर सकता है। इस प्रस्ताव को पिछले महीने रक्षा खरीद बोर्ड से प्रारंभिक मंजूरी मिल चुकी है।
बताया जा रहा है कि 18 फरवरी को होने वाले एआई शिखर सम्मेलन के सिलसिले में राष्ट्रपति मैक्रों के दिल्ली आगमन से पहले इस डील पर उच्चस्तरीय बैठक हो सकती है। समाचार एजेंसी एएनआई को रक्षा सूत्रों ने बताया कि मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए यह सौदा वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है।
वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। पाकिस्तान-चीन की बढ़ती सैन्य नज़दीकी और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच यह कमी चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में राफेल डील को वायुसेना की दीर्घकालिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रस्तावित परियोजना से वायुसेना को लंबे समय तक 4.5-जेनरेशन-प्लस मल्टीरोल लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
सूत्रों के अनुसार, इस डील के तहत खरीदे जाने वाले 114 राफेल विमानों में से करीब 80 प्रतिशत विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इनमें 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान शामिल होंगे, जिनका निर्माण फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारतीय निजी कंपनियों के सहयोग से किया जाएगा।
डील पूरी होने के बाद भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल विमानों की संख्या लगभग 150 हो जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसेना को भी 26 राफेल-एम विमान मिलेंगे, जो एयरक्राफ्ट कैरियर संचालन के अनुकूल हैं।
रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो कुल बजट का 14.68 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 प्रतिशत अधिक है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में रक्षा बजट 4.84 लाख करोड़ रुपये था, जो लगातार बढ़ते हुए 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। इस बार पहली बार रक्षा बजट में करीब 1.03 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि, इस बढ़ोतरी के बावजूद रक्षा बजट देश की जीडीपी का लगभग दो प्रतिशत ही है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन भी रक्षा पर लगभग इतना ही प्रतिशत खर्च करता है, लेकिन उसकी जीडीपी का आकार कहीं बड़ा है, जिससे उसका वास्तविक सैन्य खर्च भारत से काफी अधिक हो जाता है।













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