डेस्क : कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि अलग-अलग दलों के साथ गठबंधन की राजनीति ने जमीनी स्तर पर संगठन को नुकसान पहुंचाया है और कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर के अनुसार, इसी अनुभव के आधार पर पार्टी नेतृत्व ने यह निर्णय लिया। हालांकि, गठबंधन को लेकर अभी तक आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत बयान नहीं दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ओर से कांग्रेस को बेहद सीमित सीटों का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे पार्टी ने अस्वीकार्य माना। वहीं, वाम दलों ने भी कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर कोई खास रुचि नहीं दिखाई।
टीएमसी और लेफ्ट का रुख
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी ने कांग्रेस को केवल दो सीटों का ऑफर दिया था। गुरुवार को कोलकाता में सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि वे सभी टीएमसी-विरोधी और भाजपा-विरोधी ताकतों की एकता चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस के टीएमसी से बातचीत की खबरों के चलते वाम दल कांग्रेस के साथ गठबंधन की उम्मीद नहीं कर रहे हैं।
सभी 294 सीटों पर उतरेगी कांग्रेस
कांग्रेस ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वह राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। यह फैसला पार्टी नेतृत्व और पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई बैठक में लिया गया।
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास ‘10 राजाजी मार्ग’ पर हुई इस बैठक में राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश अध्यक्ष शुभांकर सरकार, अधीर रंजन चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कुछ नेता वर्चुअल माध्यम से भी बैठक में जुड़े।
बैठक के बाद गुलाम अहमद मीर ने कहा कि चुनावी रणनीति को लेकर व्यापक चर्चा हुई और सभी नेताओं के सुझावों के बाद सामूहिक रूप से अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि अब इसी फैसले के आधार पर प्रदेश में चुनावी तैयारियां की जाएंगी।
पिछले चुनावों का प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने वाम दलों के साथ मिलकर 92 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 2016 में पार्टी को 12.25 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 44 सीटें मिली थीं, जबकि 2021 में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसका वोट शेयर घटकर करीब 3 प्रतिशत रह गया।
रणनीति में बदलाव
सूत्रों का कहना है कि बंगाल कांग्रेस के नेताओं ने आलाकमान से यह दलील दी कि गठबंधन की राजनीति के कारण पिछले दो दशकों से पार्टी राज्य में मजबूत नहीं हो पाई। अब अकेले चुनाव लड़कर संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करने की कोशिश की जाएगी।
कांग्रेस पर्यवेक्षक सुदीप रॉय बर्मन ने फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि 2021 में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी, इससे खराब स्थिति और क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि अब अकेले चुनाव लड़कर पार्टी के पास खोने के लिए कुछ नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का अवसर है।













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