नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर ऊर्जा सुरक्षा और रूस से तेल आयात के सवालों पर भारत ने अपनी स्थिति दोहराई है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि देशवासियों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार परिस्थितियों और बदलते वैश्विक घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना सरकार की रणनीति का हिस्सा है। इस मुद्दे पर सरकार ने स्पष्ट ‘हाँ’ या ‘नहीं’ का उत्तर देने से बचते हुए कहा कि सभी निर्णय इसी प्राथमिकता के तहत लिए जाते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को मीडिया से कहा कि रूस से तेल खरीद संबंधी सवालों का उत्तर मंत्रालय ही देगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय इस मामले में सवालों को विदेश मंत्रालय के पाले में डाल देता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी शनिवार को कहा कि इस मामले में जवाब विदेश मंत्रालय देगा।
अमेरिका ने उठाया कदम
अमेरिका ने भारत पर रूस से कच्चा तेल आयात करने के लिए पिछले साल अगस्त में 25 प्रतिशत दंडात्मक आयात शुल्क लगाया था। हालांकि, अब अमेरिका ने इसे हटा दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया, जिसमें कहा गया कि भारत ने रूस से तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके साथ ही भारत ने अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों की खरीद करने और अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए फ्रेमवर्क पर सहमति व्यक्त की है।
पीयूष गोयल का बयान
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में घरेलू उत्पादकों के हितों की पूरी रक्षा की गई है। कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपजें और डेयरी उत्पाद समझौते से बाहर रखे गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर क्षेत्रों को समझौते में कोई छूट नहीं दी गई है। मीट, पोल्ट्री, सोयामील, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मिलेट्स आदि पर किसी प्रकार की रियायत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यह समझौता उन आशंकाओं को निर्मूल करता है, जिनमें कहा जा रहा था कि इससे भारतीय खेती और किसान प्रभावित हो सकते हैं।













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