डेस्क :पटना से एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। जन शक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राजद प्रमुख Lalu Prasad Yadav के पुत्र Tej Pratap Yadav ने इस मामले में खुलकर प्रतिक्रिया दी है और सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया है।
क्या है मामला?
शुक्रवार शाम पटना पुलिस ने पूर्व आईपीएस अमिताभ दास को नीट छात्रा मौत मामले में भड़काऊ पोस्ट करने के आरोप में उनके आवास से गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया और एक यूट्यूब इंटरव्यू के जरिए संवेदनशील मामले में आपत्तिजनक और भ्रामक टिप्पणी की थी। इसी क्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के पुत्र Nishant Kumar का नाम भी लिया था, जिससे विवाद और गहरा गया।
तेज प्रताप का पलटवार
एक निजी चैनल से बातचीत में तेज प्रताप यादव ने कहा कि अमिताभ दास “गलत बयानबाजी” करते रहते हैं और बिना तथ्य के आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा:
“किसी के बारे में सोच-समझकर बोलना चाहिए। अभी जिस तरह से निशांत कुमार को लेकर बयान दिए गए, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं। निशांत एक सुलझे हुए व्यक्ति हैं और अच्छे परिवार से आते हैं। मुख्यमंत्री के पुत्र होने के नाते उनकी अपनी एक छवि है, जिस पर इस तरह की टिप्पणी गलत है।”
तेज प्रताप ने यह भी कहा कि सरकार की कार्रवाई उचित है, हालांकि इसमें देरी हुई। उनके शब्दों में, “उन्हें पहले ही पकड़ लेना चाहिए था। देर से आए, पर दुरुस्त आए।”
पुराना विवाद भी चर्चा में
यह पहला मौका नहीं है जब अमिताभ दास और तेज प्रताप यादव आमने-सामने आए हों। इससे पहले एक यूट्यूब इंटरव्यू में दास ने तेज प्रताप के निजी जीवन और सरकारी आवास को लेकर टिप्पणी की थी, जिसे तेज प्रताप ने अपमानजनक बताया था। इस मामले में उन्होंने सचिवालय थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई थी। तभी से दोनों के बीच तल्खी बनी हुई थी।
कौन हैं अमिताभ दास?
अमिताभ दास 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। अपनी कार्यशैली और बयानों को लेकर वे अक्सर सुर्खियों में रहे। वर्ष 2018 में राज्य सरकार ने उन्हें “अनफिट” घोषित करते हुए जबरन सेवानिवृत्त कर दिया था। इसके बाद वे विभिन्न संगठनों से जुड़कर सार्वजनिक मंचों और मीडिया में सक्रिय रहे।
सियासी असर
नीट छात्रा मौत मामला पहले ही संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में एक पूर्व आईपीएस द्वारा मुख्यमंत्री के परिवार का नाम लिए जाने से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब यह देखना होगा कि यह मामला कानूनी दायरे में किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका बिहार की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।













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