डेस्क : पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में सैन्य टकराव खुलकर सामने आ गया है। खामेनेई के निधन से बौखलाए हिजबुल्लाह ने इजरायल पर मिसाइलें दागनी शुरू कर दीं, जिसके जवाब में इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में एयर स्ट्राइक कर दी।
बताया जा रहा है कि हिजबुल्लाह की ओर से दागी गई मिसाइलें इजरायल की उत्तरी सीमा के निकट गिरीं। मिसाइल हमलों के बाद कई इलाकों में सायरन बज उठे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अधिकांश मिसाइलें खुले क्षेत्रों में गिरीं, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि तनाव की स्थिति बनी हुई है।
ईरान के समर्थन में खुला एलान
हिजबुल्लाह ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के साथ खड़ा है और इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाएगा। गौरतलब है कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लंबे समय से टकराव चलता रहा है। इजरायली हमलों में संगठन के कई शीर्ष कमांडर मारे जा चुके हैं। युद्धविराम के समझौतों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच छिटपुट हमले होते रहे हैं।
इधर, अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, जबकि ईरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। क्षेत्रीय संघर्ष अब बहुपक्षीय युद्ध का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
भारत ने बुलाई आपात बैठक
पश्चिम एशिया की गंभीर होती स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार रात सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की आपात बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों तथा खामेनेई की मौत के बाद उत्पन्न वैश्विक हालात की समीक्षा की गई।
सूत्रों के अनुसार बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने भी हालात की जानकारी दी।
बैठक में पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। वर्तमान में पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र बड़े पैमाने पर प्रभावित है, जिससे कई भारतीय नागरिक दुबई और अन्य हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए संभावित निकासी योजनाओं पर भी विचार किया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर
सूत्रों के अनुसार ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। यह मार्ग भारतीय तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर पड़ सकता है।
आंकड़ों के अनुसार ईरान में लगभग 10,000 और इजरायल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जबकि खाड़ी देशों सहित पूरे पश्चिम एशिया में भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के संपर्क में हैं और हेल्पलाइन सेवाएं सक्रिय कर दी गई हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ता यह संघर्ष अब वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।













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