डेस्क : गुजरात में हो रहे स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर मजबूत राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया है। राज्य में 700 से अधिक भाजपा उम्मीदवार बिना किसी मुकाबले के निर्विरोध विजयी घोषित किए गए हैं। मतदान से पहले ही इतनी बड़ी संख्या में सीटों का तय हो जाना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और तालुका पंचायत की हजारों सीटों पर चुनाव प्रक्रिया चल रही है। नामांकन वापसी और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई सीटों पर विपक्षी उम्मीदवार मैदान से हट गए, जिसके चलते भाजपा उम्मीदवारों के लिए रास्ता आसान हो गया और वे बिना वोटिंग के ही विजयी हो गए।
सूत्रों का कहना है कि अंतिम चरण में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कई उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया, जिसके बाद कई क्षेत्रों में मुकाबला खत्म हो गया। इसी वजह से निर्विरोध जीत का आंकड़ा 700 से ऊपर पहुंच गया।
इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि कई क्षेत्रों में राजनीतिक दबाव और स्थानीय परिस्थितियों के कारण उनके उम्मीदवार चुनावी मैदान से हटे, जबकि भाजपा इसे जनता के समर्थन और संगठन की मजबूती का परिणाम बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति गुजरात की राजनीति में भाजपा की मजबूत जमीनी पकड़ को दर्शाती है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाती है कि इतनी बड़ी संख्या में सीटों पर मतदान से पहले ही परिणाम कैसे तय हो गए।
अब राज्य में शेष सीटों पर मतदान आगामी तिथियों पर होगा, जिसके बाद पूरे चुनावी नतीजों की तस्वीर स्पष्ट होगी।













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