नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान परिसीमन विधेयक को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के एक नेता ने दावा किया है कि इस विधेयक के लागू होने के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भी संसदीय सीटों का निर्धारण होगा और वहां से प्रतिनिधि भारत की संसद तक पहुंचेंगे, जिससे पीओके की ‘वापसी की राह’ तैयार होगी।
भाजपा नेता बूरा नरसैया गौड़ ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद लोकसभा और राज्यसभा की सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है और पीओके क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया जाएगा। उनके अनुसार, जब इस क्षेत्र में चुनाव होंगे और प्रतिनिधि चुने जाएंगे, तो यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में पीओके के समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया भारत के उस लंबे समय से चले आ रहे सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, जिसमें पीओके को देश का हिस्सा माना जाता है। उनके बयान के अनुसार, भविष्य में पीओके के लोग भी भारत के चुनावी प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे और वहां से चुने गए प्रतिनिधि संसद में पहुंचेंगे।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या परिसीमन विधेयक का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन से जुड़ी है।
गौरतलब है कि संसद में हाल ही में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर भी चर्चा हुई है, जिनको लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है।
फिलहाल, इस मुद्दे ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाज़ी होने की संभावना जताई जा रही है।













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