नई दिल्ली: राज्यसभा के उपसभापति पद को लेकर एक बार फिर हरिवंश नारायण सिंह को बड़ी सफलता मिली है। वे तीसरी बार इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के लिए निर्विरोध चुन लिए गए हैं। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने तक उनके खिलाफ किसी भी विपक्षी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके चलते उनका निर्वाचन निर्विरोध तय माना गया है।
सूत्रों के अनुसार, निर्धारित समय सीमा तक केवल एक ही नामांकन उनके समर्थन में प्राप्त हुआ। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि इस बार भी उपसभापति पद के लिए कोई मुकाबला नहीं होगा।
इस चुनाव प्रक्रिया में विपक्ष की ओर से उम्मीदवार न उतारे जाने को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संसद के उच्च सदन में सहमति और संतुलन की एक अलग तस्वीर सामने आई है।
हरिवंश नारायण सिंह 2018 से इस पद पर लगातार कार्यरत हैं और इससे पहले भी वे दो बार इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके हैं। अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से संचालित करने में अहम भूमिका निभाई है।
उनका निर्विरोध चयन एक बार फिर संसद में उनकी स्वीकार्यता और अनुभव पर राजनीतिक दलों की सहमति को दर्शाता है।













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