पटना : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को पटना में आयोजित ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस, राजद, सपा और टीएमसी जैसे दलों ने अपनी हठधर्मिता और साजिश से लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को गिरवा दिया। उन्होंने इसे देश की ‘आधी आबादी’ के साथ बड़ा विश्वासघात करार दिया।
“गरीब नहीं, केवल परिवार की महिलाएं विपक्ष की प्राथमिकता”
मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी चाहते हैं कि उनकी बहन प्रियंका गांधी सदन में जाएं, लालू यादव चाहते हैं कि उनकी बेटी मीसा भारती सांसद बनें और अखिलेश यादव की प्राथमिकता अपनी पत्नी डिंपल यादव को लोकसभा भेजने की है। इन दलों को देश की गरीब और आम महिलाओं की चिंता नहीं है। ये चाहते हैं कि केवल इनके ही परिवार की महिलाएं सदन में बैठें।”
122 बहनों के विधायक बनने का रास्ता रोका
सम्राट चौधरी ने आंकड़ों के जरिए विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि यदि 16 अप्रैल को लोकसभा में यह विधेयक पारित हो गया होता, तो बिहार की राजनीति की तस्वीर बदल जाती। उन्होंने कहा, “अगर बिल नहीं गिरता, तो अगले विधानसभा चुनाव में बिहार से 29 नहीं, बल्कि 122 बहनें विधायक बनकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़तीं। लेकिन विपक्ष ने महिलाओं के इस अधिकार को छीन लिया।”
एनडीए का शक्ति प्रदर्शन और आक्रोश मार्च
इससे पहले, एनडीए के सभी घटक दलों की महिला कार्यकर्ताओं ने राजधानी के गांधी मैदान से कारगिल चौक तक विशाल ‘आक्रोश मार्च’ निकाला। हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर महिलाओं ने विपक्षी दलों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कारगिल चौक पर मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “आपका भाई सम्राट चौधरी जब तक जिंदा है, आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए महिलाओं को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
बिहार मॉडल की चर्चा
मुख्यमंत्री ने पंचायती राज का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार में एनडीए सरकार ने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया, जिसके परिणामस्वरूप आज सदन और निकायों में लगभग 59 प्रतिशत महिला प्रतिनिधि मौजूद हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इस ‘जन आक्रोश’ को एक ज्वाला की तरह जीवित रखने का आह्वान किया ताकि चुनाव में विपक्ष को कड़ा सबक सिखाया जा सके।













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