नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने रविवार को सऊदी अरब का आधिकारिक दौरा किया। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर हुआ, जिसे खाड़ी क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत की रणनीतिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया कि डोभाल ने सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री, विदेश मंत्री और अपने समकक्ष सुरक्षा अधिकारी के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं।
जायसवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री के निर्देश पर खाड़ी देशों के साथ भारत का संपर्क लगातार जारी है। एनएसए अजीत डोभाल ने 19 अप्रैल को सऊदी अरब का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ऊर्जा मंत्री, विदेश मंत्री और अपने समकक्ष के साथ मुलाकात की। इन बैठकों में क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की गई।”
इन वार्ताओं को भारत-सऊदी संबंधों के लिए चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित बताया गया—वैश्विक व्यापार मार्गों की स्थिर आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना, होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में सुरक्षा स्थिति पर चर्चा, खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वय को मजबूत करना तथा आर्थिक सहयोग को और गहरा करना।
मध्य पूर्व में लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत ने संतुलित कूटनीतिक रुख बनाए रखा है। संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं और मानवीय संकट की स्थिति भी बनी हुई है। इसके बावजूद भारत सभी पक्षों से संयम, नागरिकों की सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान की लगातार अपील कर रहा है।
भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां लाखों भारतीय प्रवासी रहते हैं और ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से आता है। ऐसे में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इजरायल, फिलिस्तीन और ईरान सहित सभी प्रमुख पक्षों के साथ सक्रिय संवाद भारत के “रणनीतिक और आर्थिक हितों” की रक्षा के लिए आवश्यक है, खासकर मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के दौर में।













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