नई दिल्ली : पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा है कि सशस्त्र बलों को राजनीति से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णय हमेशा कैबिनेट समिति ऑन सिक्योरिटी के माध्यम से ही लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य मामलों में राजनीतिक नेतृत्व का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होता।
एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में जनरल नरवणे ने कहा कि किसी भी बयान को सीधे प्रधानमंत्री से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख निर्णय कैबिनेट समिति ऑन सिक्योरिटी द्वारा लिए जाते हैं, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सेना में आदेश हमेशा सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों के तहत ही दिए जाते हैं और इसे व्यक्तिगत बयान के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है।
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल एक पूर्णतः अराजनीतिक संस्था हैं और यही लोकतंत्र की एक मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना का कार्य राष्ट्र की सुरक्षा करना है और वे राजनीति से दूर रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं।
अपने संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि किसी भी पुस्तक या वक्तव्य की व्याख्या व्यक्ति अपनी समझ और अंतरात्मा के अनुसार करता है, लेकिन इसे राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
चीन सीमा से जुड़े अपने पुराने बयान पर पुनः स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वे आज भी इस बात पर कायम हैं कि उस समय भारत ने कोई क्षेत्र नहीं खोया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस तथ्य को स्वीकार नहीं करना चाहता, तो यह उसकी व्यक्तिगत धारणा है, लेकिन इससे वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।
जनरल नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना को जनता से जो सम्मान और विश्वास प्राप्त है, वह किसी भी नकारात्मक चर्चा से कहीं अधिक मजबूत है और यही देश की सबसे बड़ी शक्ति है।













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