नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को कड़े निर्देश जारी करते हुए गाजियाबाद में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस एसआईटी में केवल महिला पुलिस अधिकारी शामिल होंगी और इसकी कमान पुलिस आयुक्त या पुलिस महानिरीक्षक स्तर की महिला अधिकारी को सौंपी जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने आदेश देते हुए कहा कि एसआईटी में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक और पुलिस निरीक्षक स्तर की महिला अधिकारी शामिल की जाएं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जांच प्रमुख अधिकारी उत्तर प्रदेश से बाहर की होनी चाहिए, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
16 मार्च की दर्दनाक घटना
मामला 16 मार्च का है, जब गाजियाबाद में मजदूरी करने वाले एक व्यक्ति की चार वर्षीय बेटी को पड़ोसी कथित रूप से चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ ले गया था। बाद में बच्ची गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पिता ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की थी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्थानीय पुलिस की जांच से असंतोष है और निष्पक्ष जांच तथा सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं।
अस्पतालों की भूमिका की भी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने घटना के एक और गंभीर पहलू पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि घायल अवस्था में मिलने के बावजूद दो निजी अस्पतालों ने बच्ची के इलाज से कथित रूप से इनकार किया, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई। अदालत ने निर्देश दिया कि एसआईटी इन दोनों निजी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच करेगी।
पुलिस जांच पर सवाल
इससे पहले 10 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जांच में “हिचकिचाहट” को गंभीर लापरवाही बताया था। अदालत ने यह भी कहा था कि ट्रायल कोर्ट फिलहाल आरोपपत्र के आधार पर आगे की कार्यवाही न बढ़ाए।
डीजीपी को तत्काल नोटिफिकेशन का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश के डीजीपी इस विशेष एसआईटी के गठन का नोटिफिकेशन शुक्रवार देर रात तक या फिर शनिवार सुबह 11 बजे से पहले जारी करें।
यह मामला अब न्यायिक निगरानी में आगे बढ़ेगा, जिसमें जांच की पूरी प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की नजर बनी रहेगी।













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