डेस्क : गुरुग्राम से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए एक निजी कंपनी के प्रमुख के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। यह FIR एक महिला कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी प्रमुख ने बातचीत के दौरान आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए “F-off” कहा था।
शिकायतकर्ता का कहना था कि यह व्यवहार कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है, जिसके आधार पर पुलिस में मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि इस प्रकार की भाषा अनुचित और अशोभनीय है, लेकिन इसमें यौन उत्पीड़न का कोई तत्व नहीं पाया गया। अदालत ने कहा कि केवल अभद्र या अपमानजनक भाषा को यौन उत्पीड़न के कानूनी दायरे में नहीं रखा जा सकता, जब तक उसमें स्पष्ट यौन आशय न हो।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कार्यस्थल पर हुए विवादों को अनावश्यक रूप से आपराधिक मामलों में बदलना उचित नहीं है। इस आधार पर कोर्ट ने संबंधित FIR को रद्द कर दिया।
यह फैसला कार्यस्थल विवादों और यौन उत्पीड़न कानून की सीमाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।













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