नई दिल्ली: देशभर में शनिवार, 25 अप्रैल को 51.8 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की गई। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम एशिया में बदलते हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी संभावित बाधाओं के बीच ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार ने व्यापक कदम उठाए हैं।
मंत्रालय ने रविवार को जानकारी दी कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और किसी भी वितरक केंद्र पर कमी (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं बनी है। ऑनलाइन बुकिंग का स्तर उद्योग स्तर पर लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) आधारित डिलीवरी 94 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह कोड उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है और नागरिकों से घबराकर खरीदारी न करने की अपील की गई है। मंत्रालय ने कहा, “नागरिकों से अनुरोध है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी न करें, सरकार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।” साथ ही लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने और डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
वर्तमान स्थिति के बावजूद सरकार ने घरेलू एलपीजी, घरेलू पीएनजी और सीएनजी (परिवहन) की 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया है। वाणिज्यिक एलपीजी के मामले में अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, दवा उद्योग, इस्पात, ऑटोमोबाइल, बीज और कृषि क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलोग्राम एफटीएल सिलेंडर की आपूर्ति को भी दोगुना कर दिया गया है।
मांग को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाना, शहरी क्षेत्रों में बुकिंग अंतराल को 21 से बढ़ाकर 25 दिन करना और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 45 दिन तक करना शामिल है। साथ ही केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज को राज्यों को अतिरिक्त कोयला आवंटित करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने राज्यों से पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने की भी अपील की है। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और एलपीजी नियंत्रण आदेश, 2000 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिकार दिए गए हैं। सभी राज्यों में नियंत्रण कक्ष और जिला निगरानी समितियां सक्रिय हैं।
शनिवार को देशभर में 2,100 से अधिक छापेमारी की गई। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अचानक निरीक्षण कर 310 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया है और अब तक 70 वितरकों का लाइसेंस निलंबित किया जा चुका है।













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