डेस्क : देश का घरेलू विमानन क्षेत्र आज (शुक्रवार) होने वाली एटीएफ (एविएशन टरबाइन फ्यूल) कीमतों की घोषणा को लेकर सतर्क और चिंतित है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच एयरलाइंस कंपनियां आगामी संशोधन को लेकर उम्मीद और आशंका दोनों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही हैं।
सरकार ने इससे पहले संभावित भारी मूल्य वृद्धि के असर को कम करने के लिए हस्तक्षेप किया था। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संकेत इस माह जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल की ओर इशारा कर रहे थे। इसके बावजूद 1 अप्रैल को सरकार ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श कर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिया कि घरेलू एयरलाइंस के लिए कीमतों में वृद्धि को 25 प्रतिशत तक सीमित रखा जाए। इसके तहत करीब 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू की गई।
यह निर्णय उस समय लिया गया जब वैश्विक हालात असामान्य बने हुए थे। विशेष रूप से Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की संभावनाओं को जन्म दिया था।
हालांकि इस निर्णय से घरेलू एयरलाइंस को राहत मिली, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर संचालन करने वाली कंपनियों को वैश्विक दरों के अनुरूप पूरी बढ़ी हुई कीमत चुकानी पड़ रही है। अप्रैल में हुई इस वृद्धि के बाद देश की प्रमुख एयरलाइन IndiGo ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों के लिए ईंधन अधिभार में संशोधन किया था।
इसी बीच, Federation of Indian Airlines (एफआईए) ने हाल ही में सरकार को पत्र लिखकर एटीएफ कीमतों में राहत देने की मांग की है, ताकि एयरलाइंस संचालन की आर्थिक स्थिरता बनी रह सके। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंपनियां आज की घोषणा में या तो और राहत या कम से कम स्थिरता की उम्मीद कर रही हैं, जिससे बढ़ती लागत को नियंत्रित किया जा सके और हवाई किराए को किफायती रखा जा सके।
विमानन क्षेत्र पहले से ही ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव के दबाव में है, क्योंकि एटीएफ कुल परिचालन लागत का बड़ा हिस्सा होता है। यदि कीमतों में नरमी आती है तो घरेलू एयरलाइंस को राहत मिल सकती है, वहीं नई बढ़ोतरी की स्थिति में यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और तेल कंपनियां आज मई माह के लिए नई एटीएफ दरों की घोषणा कर सकती हैं। इस फैसले पर न केवल एयरलाइंस कंपनियों, बल्कि यात्रियों की भी नजरें टिकी हुई हैं।













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