कोलकाता :पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में एक बार फिर सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायोनी घोष द्वारा चुनावी सभाओं में गाए जा रहे गीत “दिल में काबा, आँखों में मदीना” को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने गंभीर आपत्ति जताई है और इसे “तुष्टिकरण की राजनीति” का उदाहरण बताया है।
भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस चुनावी लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं से जुड़े प्रतीकों का उपयोग कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस प्रकार के गीतों के जरिए विशेष वर्ग को साधने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक राजनीति की मर्यादाओं के विपरीत है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है। तृणमूल नेताओं के अनुसार यह गीत सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य समाज में एकता और सद्भाव का संदेश देना है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मियाँ पहले से ही तेज हैं और सभी प्रमुख दल चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों का यह उपयोग राज्य की चुनावी राजनीति में भावनात्मक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है।
सायोनी घोष, जो तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई की प्रमुख और जादवपुर से सांसद हैं, अपने प्रचार अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके द्वारा किए जा रहे सांस्कृतिक प्रयोग और प्रचार शैली अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बनते रहे हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और यह मामला आगामी दिनों में और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।













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