डेस्क : फिल्म ‘धुरंधर 2’ को लेकर चल रही “प्रोपेगेंडा फिल्म” की बहस के बीच मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म को केवल इसलिए प्रोपेगेंडा कहना उचित नहीं है क्योंकि उसका कथानक कुछ लोगों की सोच से मेल नहीं खाता।
मीडिया से बातचीत में जावेद अख्तर ने सवाल उठाया कि “प्रोपेगेंडा फिल्म” से आखिर लोगों का मतलब क्या होता है। उनके अनुसार, हर फिल्म किसी न किसी विचार, दृष्टिकोण या संदेश को प्रस्तुत करती है और यह सिनेमा का स्वाभाविक हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी रचनाकार को अपनी कहानी और दृष्टिकोण को स्क्रीन पर प्रस्तुत करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। अख्तर के मुताबिक, सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज और विचारों को भी प्रतिबिंबित करता है।
इसी दौरान उन्होंने ‘धुरंधर’ फिल्म की भी सराहना की और कहा कि उन्हें यह फिल्म पसंद आई, हालांकि उनके अनुसार पहला भाग दूसरे हिस्से की तुलना में अधिक प्रभावी था।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ‘धुरंधर 2’ को लेकर सोशल मीडिया और फिल्म जगत में यह बहस तेज है कि यह फिल्म एक “प्रोपेगेंडा” है या फिर देशभक्ति और विचार आधारित कहानी का हिस्सा। इसी बहस के बीच जावेद अख्तर का यह बयान सामने आया है, जिसने चर्चा को और बढ़ा दिया है।













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