डेस्क : भारत का रियल एस्टेट सेक्टर आने वाले वर्षों में तेज़ी से विस्तार करते हुए वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर सकता है। FICCI और KPMG की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2047 तक भारत का रियल एस्टेट बाजार लगभग 5.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वृद्धि देश में तेजी से हो रहे शहरीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास, आय स्तर में वृद्धि और निवेश के बढ़ते अवसरों के कारण संभव होगी। वर्तमान में यह सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और GDP में इसका योगदान लगातार बढ़ रहा है।
AI और तकनीक से बदलता सेक्टर
रिपोर्ट का सबसे प्रमुख पहलू यह है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2023 में जहाँ AI का उपयोग सीमित था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 91 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब यह क्षेत्र केवल निर्माण और बिक्री तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिज़ाइन, योजना, निर्माण प्रबंधन और संपत्ति प्रबंधन जैसे सभी चरणों में तकनीक का व्यापक उपयोग हो रहा है।
नई तकनीकों का बढ़ता प्रभाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल ट्विन्स, ब्लॉकचेन, ड्रोन तकनीक और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ रही है। इससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका
वर्तमान में रियल एस्टेट सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 7 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है और यह रोजगार सृजन का भी बड़ा माध्यम है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है।
निवेश और विकास की संभावनाएँ
सरकार द्वारा भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (REITs) और पारदर्शी नीतियों के चलते इस सेक्टर में निवेश के अवसर बढ़े हैं। साथ ही, विदेशी निवेशकों और संस्थागत निवेश की भागीदारी भी लगातार मजबूत हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दशकों में भारत का रियल एस्टेट सेक्टर न केवल आकार में बढ़ेगा, बल्कि तकनीक आधारित एक आधुनिक और संगठित उद्योग के रूप में विकसित होगा।













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