डेस्क : भारतीय सेना के पूर्व डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों और हालिया नेतृत्व बदलावों पर कड़ा और व्यंग्यात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की पदोन्नति को गंभीर रणनीतिक उपलब्धि मानने से इनकार करते हुए इसे “प्रदर्शन और दिखावे की राजनीति” बताया है।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा सैन्य स्तर पर किए जा रहे ऐसे निर्णयों को भारत गंभीर रणनीतिक बदलाव के रूप में नहीं देखता। उनके अनुसार, यह अधिकतर आंतरिक छवि निर्माण और प्रचार का हिस्सा है, जिसका वास्तविक सैन्य क्षमता से कोई सीधा संबंध नहीं है।
उन्होंने विशेष रूप से असीम मुनीर को फील्ड मार्शल के रूप में पदोन्नत किए जाने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे “रणनीतिक सफलता” के बजाय “नाटकीय प्रस्तुति” के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस प्रकार के कदमों को भारत केवल एक सीमित राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक प्रयास के रूप में देखता है।
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए आतंकी ठिकानों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया था। इस कार्रवाई में पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचों को गंभीर क्षति पहुंची थी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य केवल आतंकवाद विरोधी अभियान था और इसे पूरी तरह रणनीतिक एवं सीमित लक्ष्य के तहत अंजाम दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के बयान केवल सैन्य प्रतिक्रिया नहीं होते, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन और मनोवैज्ञानिक रणनीति का भी हिस्सा होते हैं।
पाकिस्तान की ओर से हालिया सैन्य नेतृत्व परिवर्तन और उसे “उपलब्धि” के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिशों के बीच भारत का यह बयान स्पष्ट रूप से व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक संदेश देता है।













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