डेस्क : हिज़्बुल्लाह के प्रमुख नईम क़ासिम ने संगठन के हथियारों को लेकर किसी भी प्रकार की निरस्त्रीकरण (डिसआर्मामेंट) वार्ता को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह के हथियार “प्रतिरोध और रक्षा” का हिस्सा हैं और इस मुद्दे पर कोई समझौता संभव नहीं है।
नईम क़ासिम ने अपने हालिया बयान में कहा कि लेबनान की संप्रभुता से जुड़े मामलों में किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिज़्बुल्लाह अपने सैन्य ढांचे को किसी भी राजनीतिक या कूटनीतिक शर्त के तहत समाप्त नहीं करेगा।
इज़रायल के साथ संभावित बातचीत और क्षेत्रीय दबावों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि यदि संगठन पर दबाव बनाया गया तो “इज़रायल के लिए हालात बेहद कठिन हो जाएंगे।” उनके इस बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच सीमा पर तनाव लगातार बना हुआ है और कई बार सैन्य झड़पों की स्थिति भी उत्पन्न हो चुकी है। दोनों पक्षों की ओर से हालिया महीनों में हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित कर सकते हैं और पश्चिम एशिया में शांति स्थापना की प्रक्रिया को और जटिल बना सकते हैं।













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