नई दिल्ली : भारत रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में विकसित किया जा रहा अत्याधुनिक एआई आधारित लड़ाकू विमान काल भैरव एआई एयरक्राफ्ट लगातार चर्चा में है। इसे भविष्य के युद्ध परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए एक स्वायत्त और कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित कॉम्बैट सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस परियोजना को निजी रक्षा कंपनी फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो स्वदेशी नवाचार और उन्नत एयरोस्पेस तकनीक पर काम कर रही है।
एआई आधारित स्वायत्त प्रणाली होगी मुख्य विशेषता
रिपोर्टों के अनुसार यह विमान पारंपरिक लड़ाकू विमानों से अलग एक उन्नत एआई प्रणाली पर आधारित होगा। इसमें लक्ष्य पहचान, निगरानी, मार्ग निर्धारण और मिशन निष्पादन जैसे कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वायत्त संचालन बताया जा रहा है, जिससे यह बिना मानवीय हस्तक्षेप के भी जटिल मिशनों को अंजाम दे सकेगा।
लंबी दूरी और अत्याधुनिक क्षमता का दावा
जानकारी के अनुसार इस एआई युद्ध विमान में लगभग 3000 किलोमीटर तक की परिचालन क्षमता और लगभग 30 घंटे तक निरंतर उड़ान भरने की क्षमता विकसित किए जाने का दावा किया गया है।
इसके अतिरिक्त इसमें “स्वार्म वॉरफेयर” यानी एक साथ कई यूनिट्स को समन्वित रूप से संचालित करने की क्षमता भी शामिल होने की बात कही जा रही है, जो आधुनिक युद्ध रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकास
इस परियोजना को भारत और यूरोपीय तकनीकी सहयोग के साथ विकसित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इसके कुछ तकनीकी हिस्सों, विशेषकर सिमुलेशन और संचार प्रणाली के विकास में विदेशी साझेदारी का उपयोग किया जा रहा है, जबकि मुख्य एआई और डिजाइन कार्य भारत में किया जा रहा है।
रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। इससे न केवल अत्याधुनिक ड्रोन और एआई आधारित युद्ध प्रणालियों में भारत की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य के रक्षा परिदृश्य में देश की रणनीतिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
