आगरा : सोशल मीडिया पर वर्दी पहनकर रील बनाना आठ पुलिसकर्मियों को महंगा पड़ गया। पुलिस विभाग की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन करने के आरोप में पांच उपनिरीक्षकों, दो महिला उपनिरीक्षकों और एक महिला आरक्षी को लाइन हाजिर कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है और कई पुलिसकर्मी अपने सोशल मीडिया खातों से रील हटाने में जुट गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश दोबारा जारी किए थे। लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि पुलिसकर्मी वर्दी में वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने मीडिया सेल को पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए थे।
जांच के दौरान इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वर्दी में रील साझा करने वाले आठ पुलिसकर्मियों की पहचान की गई। इनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया।
इन पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई
कार्रवाई की जद में बाह थाने के उपनिरीक्षक अरविंद सिंह राठौर और स्वाती चौधरी, पर्यटन थाने के उपनिरीक्षक दीपक चौधरी, एत्मादुद्दौला थाने के उपनिरीक्षक रोहित सोनकर और प्रदीप कुमार, न्यू आगरा थाने के हिमांशु पांडेय, खेरागढ़ थाने की उपनिरीक्षक रानू भाटी तथा फतेहाबाद थाने की महिला आरक्षी सुमन यादव शामिल हैं।
पहले भी सामने आ चुका है मामला
आगरा में इससे पहले भी सोशल मीडिया रील को लेकर एक महिला आरक्षी चर्चा में आ चुकी हैं। महिला आरक्षी प्रियंका मिश्रा ने थाने परिसर में रिवाल्वर के साथ रील बनाई थी, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी। मामले में उन्हें लाइन हाजिर किया गया था। बाद में सोशल मीडिया पर विवाद और आलोचना बढ़ने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। विभाग ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था और प्रशिक्षण पर हुए खर्च की राशि भी उनसे वसूल की गई थी।
सोशल मीडिया को लेकर सख्त नियम
पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी पहनकर रील अथवा वीडियो नहीं बना सकता। पुलिस थानों, कार्यालयों, सरकारी वाहनों और अन्य पुलिस परिसरों में वीडियो शूट करने तथा हथियारों के प्रदर्शन पर भी पूर्ण प्रतिबंध है।
इसके अलावा किसी भी लंबित जांच, संवेदनशील मामले, संदिग्ध या गिरफ्तार व्यक्तियों से जुड़ी गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकती। निजी सोशल मीडिया खातों पर पोस्ट करते समय भी पुलिसकर्मियों को यह स्पष्ट करना होगा कि व्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं, विभाग की आधिकारिक राय नहीं।
विभागीय निर्देशों के अनुसार पुलिसकर्मी सोशल मीडिया सामग्री के माध्यम से किसी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं ले सकते और न ही किसी राजनीतिक प्रचार या अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
