नई दिल्ली : दूरसंचार विभाग ने पीएम-वाणी (प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस) ढांचे के तहत नागरिकों के लिए कई नई और उपयोगकर्ता-अनुकूल सुधारों की घोषणा की है। इन सुधारों का उद्देश्य देशभर में सार्वजनिक वाई-फाई की पहुंच को आसान बनाना और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
सूचना एवं संचार मंत्रालय के अनुसार, इन नए प्रावधानों में लैपटॉप और अन्य सहायक उपकरणों के लिए क्यूआर कोड आधारित प्रमाणीकरण, लचीले और अल्प अवधि वाले वाई-फाई प्लान तथा हॉटस्पॉट नामों का मानकीकरण शामिल है, ताकि नेटवर्क की पहचान आसान और अधिक विश्वसनीय हो सके। यह सभी बदलाव 22 मई को जारी दूरसंचार विभाग के परिपत्रों के माध्यम से लागू किए गए हैं।
मंत्रालय ने सभी संबंधित हितधारकों को निर्देश दिया है कि वे आठ सप्ताह के भीतर इन संशोधित दिशानिर्देशों को लागू करें, ताकि जुलाई 2026 तक पूरे पीएम-वाणी पारिस्थितिकी तंत्र में ये सुविधाएँ पूरी तरह सक्रिय हो सकें।
नई व्यवस्था के तहत अब उपयोगकर्ता अपने स्मार्टफोन में प्रमाणित ऐप के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन करके लैपटॉप और अन्य उपकरणों को भी सार्वजनिक वाई-फाई से जोड़ सकेंगे। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था से लॉगिन प्रक्रिया सरल होगी और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग सुनिश्चित करते हुए उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर बनेगा।
इसके अलावा हॉटस्पॉट संचालकों को 15, 30 और 60 मिनट की अल्प अवधि वाली इंटरनेट योजनाएँ शुरू करने की सलाह दी गई है। यह विशेष रूप से परिवहन केंद्रों, मॉल और सार्वजनिक स्थानों पर उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी होगी, जहाँ लोग थोड़े समय के लिए इंटरनेट सेवाओं का उपयोग करते हैं।
मंत्रालय के अनुसार, ये लचीली योजनाएँ यात्रियों, छात्रों और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए किफायती विकल्प प्रदान करेंगी, साथ ही हॉटस्पॉट के उपयोग और ऑपरेटरों की आय में भी वृद्धि कर सकती हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत अब सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट के नाम या एसएसआईडी को एक मानकीकृत पीएम-वाणी ब्रांडिंग प्रारूप में रखा जाएगा, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से असली और सुरक्षित नेटवर्क की पहचान कर सकेंगे।
दूरसंचार मंत्रालय ने कहा है कि सार्वजनिक वाई-फाई अब छात्रों, यात्रियों, पेशेवरों और छोटे व्यवसायों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधा के रूप में उभर रहा है।
इस पहल को संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश में सस्ती और व्यापक डिजिटल कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है।













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