कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य में स्थापित पहले होल्डिंग सेंटर में 12 बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है, जिनकी पहचान अवैध प्रवासी के रूप में की गई है। इनमें से नौ को मालदा जिले के होल्डिंग सेंटर में रखा गया है, जबकि शेष को अन्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया है।
राज्य सरकार ने हाल ही में विभिन्न जिलों में ऐसे होल्डिंग सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया था, जहां उन विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा जिनकी नागरिकता की पुष्टि हो चुकी है और जिनकी अपने देश वापसी की प्रक्रिया जारी है। इसी योजना के तहत मालदा और मुर्शिदाबाद में पहले केंद्र शुरू किए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन केंद्रों का उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को सामान्य जेलों से अलग रखना तथा उनकी पहचान और निर्वासन संबंधी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा करना है। केंद्रों में सुरक्षा, आवास और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
सीमावर्ती जिलों में अवैध घुसपैठ लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक चिंता का विषय रही है। राज्य सरकार का कहना है कि विदेशी नागरिकों की पहचान, सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया को तेज करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इस बीच, होल्डिंग सेंटरों की स्थापना को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रावधानों और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है।













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